Buddheshwar Mahadev Temple: 2.31 करोड़ से सजेगा लखनऊ का बुद्धेश्वर महादेव मंदिर, बनेगा आधुनिक तीर्थ स्थल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर को आधुनिक स्वरूप देने के लिए सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से जारी है। इस परियोजना के लिये 2.31 करोड़ से अधिक धनराशि स्वीकृत की गई है। वर्तमान में मंदिर परिसर में आगंतुक सुविधाओं के उन्नयन, आवाजाही में सुधार और ऐतिहासिक महत्त्व के संरक्षण से जुड़े अनेक कार्य प्रगति पर हैं। प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि प्रमुख धार्मिक स्थलों को सुदृढ़ करना सरकार की प्राथमिकता है। बुद्धेश्वर महादेव मंदिर लखनऊ के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है और प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में कई महत्वपूर्ण कार्य लगभग पूर्णता की ओर हैं, जिनमें नया ग्रेनाइट मार्ग, संरचनात्मक सुरक्षा के लिये रिटेनिंग वॉल तथा आधुनिक मुख्य प्रवेश द्वार का निर्माण शामिल है। इन सभी विकास कार्यों से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को सुगमता, सुरक्षा और स्वच्छ वातावरण प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में नया ग्रेनाइट मार्ग लगभग तैयार हो चुका है। मंदिर सीमा की सुरक्षा तथा कटाव रोकने के लिए बनाई जा रही मजबूत रिटेनिंग वॉल कार्य को गति दी गई है।
इसके अलावा, नया भव्य प्रवेश द्वार भी आकार ले रहा है, जिससे मंदिर का प्रवेश क्षेत्र और अधिक आकर्षक व व्यवस्थित हो जाएगा। जयवीर सिंह ने कहा कि “बुद्धेश्वर महादेव मंदिर केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि लखनऊ की सदियों पुरानी आध्यात्मिक धरोहर है। भस्मासुर और त्रेतायुग की कथाओं से जुड़े इस स्थल को सुरक्षित रखना हमारा दायित्व है। हमारा प्रयास है कि इसे ऐसा स्वरूप दिया जाए जिससे श्रद्धालु आधुनिक सुविधाओं के साथ अपनी आस्था, इतिहास और संस्कृति का अनुभव कर सकें। सरकार का लक्ष्य है कि यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतनी ही प्रेरणादायक बनी रहे।”
गौरतलब है कि राजा बक्शी द्वारा स्थापित यह प्राचीन बुद्धेश्वर महादेव मंदिर भस्मासुर की प्रसिद्ध कथा से जुड़ा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान शिव द्वारा वरदान प्राप्त करने के बाद जब भस्मासुर ने वही वरदान शिव पर आज़माने का प्रयास किया, तभी देवता इस स्थान पर पहुँचे।
माना जाता है कि यहीं शिव को भस्मासुर का ध्यान भटकाने के लिए नृत्य का उपाय सुझाया गया, जिसके दौरान भस्मासुर ने स्वयं अपना हाथ अपने सिर पर रख लिया और भस्म हो गया। कहा जाता है कि इसी कथा से “बुद्धेश्वर” नाम की उत्पत्ति हुई। स्थानीय मान्यता यह भी है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है, मानव-निर्मित नहीं। यह भी विश्वास है कि माता सीता और लक्ष्मण ने इसी शिवलिंग पर जलाभिषेक किया था। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिये पहुंचते हैं।

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